युवा रोजगार बनाम सरकारी लाभ: एलन मिलबर्न का बड़ा बयान
हाल ही में बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक गतिशीलता आयोग (Social Mobility Commission) के पूर्व अध्यक्ष एलन मिलबर्न ने सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर कड़ा प्रहार किया है। मिलबर्न ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार द्वारा युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने के बजाय उन्हें ‘बेनिफिट्स’ या सरकारी लाभ देने पर अधिक खर्च करना एक ‘शर्मनाक’ स्थिति है।
क्या है पूरा मामला?
एलन मिलबर्न का मानना है कि ब्रिटेन में युवा पीढ़ी एक ऐसे चक्र में फंस गई है जहां उन्हें काम करने के अवसर देने के बजाय आर्थिक मदद पर निर्भर बनाया जा रहा है। मिलबर्न के अनुसार, यह नीति न केवल युवाओं की क्षमता को बर्बाद कर रही है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी दीर्घकालिक नुकसान का कारण बन रही है। उनका तर्क है कि निवेश युवाओं के ‘हुनर और रोजगार’ पर होना चाहिए, न कि केवल उनकी ‘निर्भरता’ पर।
‘हुनर’ बनाम ‘मुफ्त मदद’
मिलबर्न ने अपने बयानों में इस बात पर जोर दिया है कि सरकार को अपनी प्राथमिकताओं को पुनर्गठित करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार:
- युवाओं को स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) की जरूरत है, न कि वित्तीय सहायता की।
- सरकारी खर्च को उत्पादक कार्यों (रोजगार सृजन) की ओर मोड़ा जाना चाहिए।
- अल्पकालिक लाभ युवाओं के आत्मविश्वास और भविष्य को कमजोर करते हैं।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि जब सरकारें रोजगार सृजन के बजाय केवल कल्याणकारी योजनाओं (welfare schemes) पर ध्यान केंद्रित करती हैं, तो समाज में आलस्य और आर्थिक सुस्ती आने का खतरा बढ़ जाता है। मिलबर्न ने चेतावनी दी है कि यदि इस स्थिति को नहीं बदला गया, तो आने वाली पीढ़ी के लिए करियर के अवसर और भी सीमित हो जाएंगे।
निष्कर्ष
एलन मिलबर्न की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में आर्थिक मंदी और बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उनके विचार सरकार को एक नई दिशा सोचने पर मजबूर करते हैं—जहां सहायता से ज्यादा ‘सशक्तीकरण’ पर जोर दिया जाए।
