जंतर मंतर हिंसा पर नसीरुद्दीन शाह का भावुक बयान
हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन और संजीदा कलाकारों में से एक, नसीरुद्दीन शाह अक्सर बेबाक राय रखने के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में जंतर मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने उन्हें झकझोर कर रख दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान, इस घटना पर बात करते हुए अभिनेता का दर्द छलक पड़ा और उन्होंने छात्रों पर हुए कथित ‘जुल्म’ की कड़ी निंदा की।
‘यह देखकर दुख होता है’, बोले अभिनेता
नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि देश के भविष्य यानी युवाओं के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने उन दृश्यों का जिक्र किया जहां छात्रों को सुरक्षा बलों और अन्य तत्वों द्वारा दबाने की कोशिश की गई। अभिनेता ने कहा, ‘एक कलाकार के तौर पर नहीं, बल्कि एक नागरिक के तौर पर यह देखना बहुत दुखद है कि हमारे देश के छात्र, जो कल का भविष्य हैं, उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए इस तरह के हिंसात्मक माहौल का सामना करना पड़ रहा है।’
देश में बढ़ते ‘जुल्म’ पर तंज
अपने संबोधन में नसीरुद्दीन शाह ने ‘जुल्म’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए मौजूदा व्यवस्था पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब सत्ता और तंत्र मिलकर छात्रों की आवाज को कुचलने की कोशिश करते हैं, तो यह समाज के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा, ‘जो लोग सत्ता में हैं, उन्हें समझना चाहिए कि असहमति लोकतंत्र का आधार है। छात्रों को डराना, उन्हें पीटना या उन पर जुल्म करना किसी भी सभ्य समाज की पहचान नहीं है।’
कलाकारों की जिम्मेदारी पर जोर
नसीरुद्दीन शाह ने यह भी कहा कि फिल्म जगत के लोगों को भी अब अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। उन्होंने माना कि कई बार डर के कारण लोग कुछ नहीं बोल पाते, लेकिन अगर अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई, तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने छात्रों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि वे निडर होकर अपने हक के लिए लड़ रहे हैं, जो कि एक सराहनीय बात है।
निष्कर्ष
नसीरुद्दीन शाह का यह बयान सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। जहां एक ओर लोग उनके समर्थन में आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर बहस भी छिड़ गई है। बहरहाल, दिग्गज अभिनेता की यह टिप्पणी एक बार फिर यह याद दिलाती है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
