जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन: क्या है विवाद?
देशभर में नीट (NEET-UG) परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के मामले ने तूल पकड़ लिया है। छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में भी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके विरोध को ‘चयनात्मक’ (selective) करार दिया है।
जेपी नड्डा का राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष केवल उन मामलों पर शोर मचाता है जो उनके राजनीतिक एजेंडे में फिट बैठते हैं। नड्डा ने पूछा, ‘राहुल गांधी पेपर लीक पर इतनी आक्रामकता दिखा रहे हैं, लेकिन जब उनके शासित राज्यों में ऐसी घटनाएं होती हैं, तो वे चुप क्यों रहते हैं?’
नड्डा ने आगे कहा कि सरकार नीट परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार पारदर्शी तरीके से जांच करवा रही है।
विपक्ष की मांग और जंतर-मंतर का नजारा
जंतर-मंतर पर एकत्र हुए छात्रों की मांग है कि नीट परीक्षा रद्द की जाए और पूरे मामले की सीबीआई (CBI) या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच हो। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि एनटीए (NTA) की कार्यप्रणाली पर भरोसा खत्म हो चुका है और उन्हें भविष्य को लेकर गहरी चिंता है।
क्या सरकार ने दी सफाई?
शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वे छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। मंत्रालय ने कहा है कि जहां भी गड़बड़ी की सूचना मिली है, वहां सख्त कार्रवाई की जा रही है। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि काउंसलिंग प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जाएगा।
निष्कर्ष
नीट पेपर लीक का मामला अब केवल छात्रों की मांग से आगे बढ़कर एक बड़ी राजनीतिक बहस में बदल चुका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। छात्रों को बस इस बात की उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिले और उनकी मेहनत का फल उन्हें मिले।
