IIT मद्रास और पूर्व छात्र की सफलता की कहानी
हाल ही में द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट ने भारतीय शिक्षा और स्टार्टअप जगत में हलचल मचा दी है। आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के एक पूर्व छात्र द्वारा शुरू की गई कंपनी के आईपीओ (IPO) ने संस्थान के लिए 112 करोड़ रुपये का जैकपॉट साबित किया है। यह कहानी न केवल नवाचार की है, बल्कि संस्थान और उसके पूर्व छात्रों के बीच के मजबूत बंधन का भी एक बेहतरीन उदाहरण है।
कैसे शुरू हुआ यह सफर?
यह सफलता कहानी ‘एक्सेलसियर’ (Exelsys) या समान स्टार्टअप्स के उस दौर की याद दिलाती है, जहां आईआईटी मद्रास के रिसर्च पार्क ने इनक्यूबेशन को बढ़ावा दिया। एमटेक (MTech) के छात्र ने अपनी पढ़ाई के दौरान जिस कंपनी की नींव रखी थी, आज वह शेयर बाजार में एक बड़ी पहचान बन चुकी है। कंपनी के आईपीओ आते ही इसके शेयर की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया, जिससे आईआईटी मद्रास को अपने निवेश पर भारी मुनाफा हुआ है।
संस्थान के निवेश का बड़ा लाभ
आईआईटी मद्रास के इनक्यूबेशन सेल (IITMIC) ने शुरुआती दिनों में इन स्टार्टअप्स में बहुत कम निवेश किया था। हालांकि, वर्षों की मेहनत, अनुसंधान और व्यावसायिक विस्तार के बाद, जब कंपनी सार्वजनिक हुई (IPO), तो उस छोटे से निवेश की कीमत बढ़कर 112 करोड़ रुपये हो गई। यह आईआईटी मद्रास के लिए एक बड़ी वित्तीय उपलब्धि है, जो अब इस राशि का उपयोग शोध और नवाचार को और अधिक गति देने के लिए करेगा।
नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति
आईआईटी मद्रास का ‘रिसर्च पार्क’ देश के सबसे सफल स्टार्टअप इनक्यूबेटर्स में से एक माना जाता है। यहाँ छात्रों को केवल डिग्री नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें उद्यमी (Entrepreneur) बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अकादमिक और इंडस्ट्री का सही मेल देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
निष्कर्ष
यह 112 करोड़ रुपये का जैकपॉट केवल एक वित्तीय आंकड़े के बारे में नहीं है, बल्कि यह आईआईटी मद्रास के उस विजन की जीत है जिसने अपने छात्रों को ‘नौकरी मांगने वाला’ नहीं, बल्कि ‘नौकरी देने वाला’ बनाया। यह आने वाले समय में अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा।
