पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की वकीलों को नसीहत: ‘सद्बुद्धि आएगी’
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) के कार्यान्वयन को लेकर वकीलों द्वारा की जा रही हड़ताल पर कड़ी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वकीलों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और अदालती कार्यवाही को बाधित करने से बचना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम’ (LADCS) का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना है। हालांकि, कई वकील संघों का तर्क है कि यह सिस्टम निजी प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के हितों के खिलाफ है। इसी के विरोध में पंजाब और हरियाणा के विभिन्न जिलों में वकीलों ने काम बंद हड़ताल का आह्वान किया है, जिससे न्यायिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: ‘Wiser heads will prevail’
सुनवाई के दौरान, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि बार एसोसिएशनों को यह समझना चाहिए कि हड़ताल से आम जनता को कितना नुकसान हो रहा है। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि ‘Wiser heads will prevail’ यानी वकीलों के बीच बेहतर समझ रखने वाले लोग सामने आएंगे और इस गतिरोध को खत्म करेंगे।
अदालत ने कहा, “कानूनी बिरादरी को यह याद रखना चाहिए कि उनकी पहली प्राथमिकता न्याय के प्रशासन में सहयोग करना है। अदालती कार्यवाही को रोकना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।”
हड़ताल का न्यायिक कामकाज पर असर
वकीलों की इस हड़ताल के कारण हज़ारों मुकदमों की सुनवाई टल रही है, जिससे कैदियों और उन लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है जो न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वकीलों का यह कदम न्यायिक अनुशासन की परिधि से बाहर है।
निष्कर्ष
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की यह टिप्पणी पूरे देश के वकीलों के लिए एक संदेश है। वकालत का पेशा एक नोबल प्रोफेशन है, जहां हड़ताल से ज्यादा बातचीत और कानूनी तरीके से अपनी मांगों को रखना अधिक प्रभावी होता है। उम्मीद की जा रही है कि बार और बेंच के बीच जल्द ही सहमति बनेगी और न्याय की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ेगी।
