साउथहॉल में जत्थेदार का बड़ा संदेश: युवाओं से घर वापसी की अपील
हाल ही में यूके के साउथहॉल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने पंजाब और हरियाणा के प्रवासी युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण और भावुक संदेश दिया है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया है कि वे विदेशों के संघर्षपूर्ण जीवन को छोड़कर अपने वतन लौटें और पंजाब की धरती पर ही अपने भविष्य को संवारें।
विदेश प्रवास का कड़वा सच
जत्थेदार ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के युवा बेहतर भविष्य की तलाश में विदेशों का रुख कर रहे हैं, लेकिन वहां का जीवन जितना बाहर से चमकता हुआ दिखता है, हकीकत में उतना ही कठिन है। उन्होंने युवाओं को आगाह किया कि कई बार युवा अपनी मेहनत की कमाई और जवानी का एक बड़ा हिस्सा विदेशी जमीनों पर संघर्ष में गंवा देते हैं। उन्होंने कहा, ‘बाहर की चकाचौंध के पीछे छिपा हुआ संघर्ष बहुत गहरा है। वहां जाकर अपनी जड़ों से कट जाना भविष्य के लिए अच्छा नहीं है।’
‘अपने वतन को बनाएं कर्मभूमि’
ज्ञानी रघबीर सिंह ने जोर देकर कहा कि पंजाब के पास कृषि, व्यापार और नए स्टार्टअप के असीमित अवसर हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि जो ऊर्जा और कौशल वे विदेशों में निवेश कर रहे हैं, यदि उसे पंजाब और हरियाणा के विकास में लगाया जाए, तो इन राज्यों को फिर से खुशहाल और विकसित बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘अपने घर, अपने समाज और अपनी संस्कृति के बीच रहकर जो सम्मान और प्रगति मिल सकती है, वह किसी दूसरे देश में संभव नहीं है।’
समुदाय का सहयोग और जिम्मेदारी
इस अवसर पर उन्होंने प्रवासी पंजाबियों से भी अनुरोध किया कि वे अपने गांव और शहरों के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि विदेशों में बस चुके सफल पंजाबियों को अपने मूल स्थानों पर निवेश करना चाहिए और स्थानीय युवाओं के लिए अवसर पैदा करने चाहिए। यह केवल युवाओं की वापसी की बात नहीं है, बल्कि पंजाब के पुनर्निर्माण की एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष
जत्थेदार की यह अपील ऐसे समय पर आई है जब पंजाब के युवाओं का एक बड़ा वर्ग विदेश पलायन (Brain Drain) को ही एकमात्र रास्ता मान बैठा है। यह संदेश युवाओं को आत्म-चिंतन के लिए प्रेरित करता है कि क्या वाकई बाहरी दुनिया में ही सफलता का मानक छुपा है, या अपनी मिट्टी में रहकर भी एक गौरवशाली भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।
