अपूर्वा मुखिजा का दर्द: ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद के बाद मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा बयान
हाल ही में मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अपूर्वा मुखिजा, जिन्हें ‘द रिबेल्किड’ (The Rebel Kid) के नाम से भी जाना जाता है, ने कॉमेडियन समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ (India’s Got Latent) से जुड़े विवाद पर चुप्पी तोड़ी है। अपूर्वा ने खुलासा किया है कि शो के दौरान हुई आलोचनाओं और ट्रोलिंग ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि वह गहरे मानसिक तनाव में चली गई थीं।
क्या था पूरा विवाद?
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में अपनी उपस्थिति के दौरान, अपूर्वा को कुछ टिप्पणियों और सोशल मीडिया पर मिली प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। शो के दौरान हुई बातचीत और उसके बाद इंटरनेट पर चलने वाली बहस ने अपूर्वा को एक कठिन दौर में धकेल दिया। अपूर्वा ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन नफरत (online hate) का इस कदर सामना करना पड़ा कि वह इसे संभाल नहीं पा रही थीं।
‘सुसाइड के विचार आने लगे थे’
एक हालिया इंटरव्यू में, अपूर्वा ने साझा किया कि ऑनलाइन ट्रोलिंग की गंभीरता इतनी अधिक थी कि उनके मन में आत्मघाती विचार (suicidal thoughts) आने लगे थे। उन्होंने कहा, ‘मैं उस स्थिति में थी जहाँ मुझे लगा कि अब सब खत्म कर देना चाहिए। उस समय मुझे लगा कि क्या मेरा अस्तित्व किसी भी चीज से अधिक महत्वपूर्ण है?’ उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह की नफरत किसी को भी मानसिक रूप से तोड़ सकती है।
सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य
यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और उसके गंभीर परिणामों पर सवाल खड़े करता है। अपूर्वा का कहना है कि लोग अक्सर स्क्रीन के पीछे बैठकर किसी की भावनाएं आहत कर देते हैं, लेकिन वे यह नहीं समझते कि इसका उस व्यक्ति के निजी जीवन पर क्या असर पड़ता है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि इंटरनेट पर लोगों को अधिक सहानुभूति और समझदारी बरतने की जरूरत है।
क्या है समय रैना का पक्ष?
हालांकि समय रैना के शो पर अक्सर विवाद होते रहते हैं, लेकिन ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ की इस घटना ने कंटेंट क्रिएटर और उनके मेहमानों की सुरक्षा को लेकर एक बहस छेड़ दी है। अपूर्वा की इस बहादुरी भरी स्वीकारोक्ति के बाद, फैंस और कई साथी इन्फ्लुएंसर्स उनके समर्थन में खड़े हुए हैं और ऑनलाइन साइबर बुलिंग के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं।
अपूर्वा का यह बयान उन सभी युवाओं के लिए एक संदेश है जो सोशल मीडिया की चकाचौंध में अपनी मानसिक शांति खो देते हैं। मुश्किल समय में मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस है।
