Apple Music ने भारत में बढ़ाई सब्सक्रिप्शन कीमतें: जानें क्या है नई दरें
टेक दिग्गज Apple ने भारत में अपने म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘Apple Music’ की कीमतों में बदलाव किया है। म्यूजिक इंडस्ट्री के एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म ‘Music Ally’ की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अपने सब्सक्रिप्शन प्लान्स को महंगा कर दिया है। यह कदम वैश्विक स्तर पर एप्पल की सेवा शुल्क नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
नए सब्सक्रिप्शन प्लान और कीमतें
एप्पल म्यूजिक के भारतीय ग्राहकों के लिए संशोधित कीमतें इस प्रकार हैं:
- इंडिविजुअल प्लान: पहले 99 रुपये प्रतिमाह था, जिसे अब बढ़ाकर 129 रुपये कर दिया गया है।
- फैमिली प्लान: पहले 149 रुपये प्रतिमाह था, जो अब 199 रुपये हो गया है।
- स्टूडेंट प्लान: छात्रों के लिए भी कीमत 49 रुपये से बढ़कर 79 रुपये कर दी गई है।
यह बढ़ोतरी उन मौजूदा ग्राहकों के लिए भी लागू होगी जो अपने सब्सक्रिप्शन को रिन्यू (Renew) करेंगे।
कीमतें क्यों बढ़ाई गई हैं?
एप्पल की ओर से हालांकि आधिकारिक रूप से कीमतों में बदलाव का सटीक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि रॉयल्टी भुगतान में वृद्धि, स्थानीय मुद्रा में उतार-चढ़ाव और कंटेंट लाइब्रेरी को और अधिक प्रीमियम बनाने के निवेश के कारण यह निर्णय लिया गया है। एप्पल लगातार अपने ‘लॉसलेस ऑडियो’ और ‘स्पेशियल ऑडियो’ फीचर्स पर जोर दे रहा है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे के खर्च में काफी इजाफा हुआ है।
म्यूजिक स्ट्रीमिंग बाजार पर असर
भारत में म्यूजिक स्ट्रीमिंग का बाजार काफी प्रतिस्पर्धी है। Spotify, YouTube Music, Amazon Music और JioSaavn जैसे प्लेटफॉर्म्स के बीच एप्पल म्यूजिक की यह प्राइस हाइक उसे अन्य कंपनियों के मुकाबले थोड़ी महंगी बनाती है। हालांकि, एप्पल इकोसिस्टम (iPhone, iPad, Mac) का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए यह सेवा अभी भी पहली पसंद बनी हुई है क्योंकि इसका इंटीग्रेशन बहुत सहज है।
उपयोगकर्ताओं के लिए क्या है विकल्प?
जो ग्राहक एप्पल म्यूजिक की बढ़ी हुई कीमतों से संतुष्ट नहीं हैं, वे अन्य विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। Spotify और YouTube Music अभी भी कुछ मामलों में सस्ते विकल्प प्रदान कर रहे हैं। हालांकि, एप्पल म्यूजिक का हाई-फिडेलिटी साउंड क्वालिटी का अनुभव इसे एक अलग श्रेणी में रखता है, जिसके लिए संगीत प्रेमी अधिक भुगतान करने को तैयार हो सकते हैं।
एप्पल की यह रणनीति यह दर्शाती है कि कंपनी अब यूजर बेस बढ़ाने के साथ-साथ अपने ‘सर्विसेज’ रेवेन्यू को मजबूत करने पर भी पूरा ध्यान दे रही है।
