26/07/2026

आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान: INS महेंद्रगिरि

हाल ही में अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नौसेना के नए युद्धपोत ‘INS महेंद्रगिरि’ का विशेष उल्लेख किया। पीएम मोदी ने इस पोत को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प का एक जीवंत प्रतीक बताया है। यह युद्धपोत न केवल भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि देश की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता की कहानी भी बयां करता है।

क्या है INS महेंद्रगिरि की खासियत?

INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट 17A का सातवां और अंतिम युद्धपोत है। इसका निर्माण ‘मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड’ (MDL) द्वारा किया गया है। यह अत्याधुनिक तकनीक, हथियारों और सेंसर से लैस एक विध्वंसक पोत (Frigate) है। इसकी विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सफलता को प्रदर्शित करता है।

पीएम मोदी ने क्यों की प्रशंसा?

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि INS महेंद्रगिरि का नाम उड़ीसा की पहाड़ियों के नाम पर रखा गया है, जो गौरव और शक्ति का प्रतीक है। पीएम ने जोर दिया कि जब हम अपनी रक्षा प्रणालियों में आत्मनिर्भर बनते हैं, तो यह न केवल हमारी सामरिक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि पूरी दुनिया में भारत का मान भी बढ़ाता है। उन्होंने इस परियोजना में लगे वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कामगारों के प्रयासों की सराहना की।

समुद्री सुरक्षा में नई मजबूती

INS महेंद्रगिरि का जलावतरण भारतीय नौसेना के लिए एक मील का पत्थर है। यह पोत समुद्र में किसी भी तरह के खतरे से निपटने में सक्षम है। इसकी स्टेल्थ (Stealth) तकनीक इसे दुश्मन के रडार से छिपने में मदद करती है, जिससे यह नौसेना की स्ट्राइक क्षमता में एक घातक इजाफा करता है। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती सक्रियता और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए, ऐसे युद्धपोतों का शामिल होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

INS महेंद्रगिरि महज एक युद्धपोत नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के सपनों और उनके सामर्थ्य का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री के शब्दों में, यह नया भारत है जो अब दुनिया को अपनी तकनीकी श्रेष्ठता दिखा रहा है। आत्मनिर्भर भारत का यह सफर निरंतर जारी है, और INS महेंद्रगिरि इस दिशा में एक सशक्त कदम है।

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