30/07/2026

बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त रुख: नितिन गडकरी को मिली डीपफेक के खिलाफ कानूनी लड़ाई की अनुमति

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग के बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम) और गूगल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अनुमति दे दी है। यह मामला ‘E20 ईंधन’ (इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) से संबंधित एक भ्रामक और फर्जी डीपफेक वीडियो से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में उन्हें कथित तौर पर ई20 ईंधन (E20 Fuel) के खिलाफ बोलते हुए और सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए दिखाया गया था। हालांकि, यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी था और इसे एआई तकनीक का उपयोग करके बनाया गया था ताकि जनता को गुमराह किया जा सके।

नितिन गडकरी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालती रुख अपनाया। उनका आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हैं, जो न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि राष्ट्रीय नीति के बारे में गलत जानकारी भी फैलाते हैं।

अदालत की टिप्पणी और आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए मेटा और गूगल को निर्देशित किया है कि वे ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाएं जो कानून के दायरे में आपत्तिजनक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति इस तरह के उल्लंघन की शिकायत करता है, तो प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी बनती है कि वे ‘आईटी नियमों’ के तहत उसे हटाए। गडकरी के वकीलों ने तर्क दिया कि एआई का उपयोग करके उनकी पहचान और आवाज का दुरुपयोग किया गया है, जो कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम का उल्लंघन है।

तकनीकी दिग्गजों की जिम्मेदारी

यह मामला भारत में एआई-जनित सामग्री (AI-generated content) के नियमन पर एक बड़ी बहस छेड़ता है। बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स अक्सर ‘मध्यस्थ’ (intermediary) होने का दावा करते हैं, लेकिन कोर्ट का यह फैसला यह संकेत देता है कि भ्रामक डीपफेक के प्रसार को रोकने की जवाबदेही अंततः इन कंपनियों की है। भारत सरकार भी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि सोशल मीडिया कंपनियों को फर्जी कंटेंट और डीपफेक के खिलाफ सख्त ‘टेक-डाउन’ नीति अपनानी होगी।

निष्कर्ष

नितिन गडकरी बनाम मेटा और गूगल का यह मामला आने वाले समय में एक मिसाल बन सकता है। यह न केवल राजनेताओं बल्कि आम नागरिकों के लिए भी सुरक्षा का एक मार्ग प्रशस्त करेगा, जो अक्सर डीपफेक का शिकार बनते हैं। अब देखना यह होगा कि मेटा और गूगल इस आदेश के बाद अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में क्या बड़े बदलाव लाते हैं।

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