चीन निर्मित TBM का सुरक्षा जोखिम: भारत की नई रणनीति
हाल के दिनों में भारत के बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infra Projects) में चीन निर्मित ‘टनल बोरिंग मशीनों’ (TBM) को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं सामने आई हैं। इन मशीनों में कथित तौर पर ‘बैकडोर’ (सॉफ्टवेयर में छिपा हुआ प्रवेश द्वार) पाए जाने के बाद, भारत सरकार ने अपने रणनीतिक और संवेदनशील प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह से ‘चीन-प्रूफ’ बनाने की दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है।
क्या है TBM शॉक?
टनल बोरिंग मशीनें जटिल सुरंगों के निर्माण के लिए रीढ़ की हड्डी के समान हैं। हालांकि, हालिया जांच में पाया गया कि चीन से आयातित इन मशीनों के सॉफ्टवेयर में ऐसी विशेषताएं हो सकती हैं जो विदेशी सर्वर के साथ डेटा साझा कर सकती हैं या मशीनों को दूर से नियंत्रित (Remote Control) करने की अनुमति दे सकती हैं। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है, क्योंकि इन मशीनों का उपयोग रक्षा से जुड़े सीमावर्ती इलाकों और रणनीतिक सुरंगों के निर्माण में हो रहा है।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एक बहुआयामी नीति अपना रही है। इसके तहत:
- सख्त सुरक्षा ऑडिट: सभी आयातित उपकरणों के लिए अनिवार्य तकनीकी सुरक्षा ऑडिट लागू किया जा रहा है।
- घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन: भारत अब स्वदेशी TBM निर्माण क्षमताओं को विकसित करने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को प्रोत्साहित कर रहा है।
- वेंडर का विविधीकरण: यूरोप, अमेरिका और जापान जैसे मित्र राष्ट्रों से तकनीक और मशीनरी आयात करने के विकल्पों पर जोर दिया जा रहा है।
रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर सुरक्षा का पहरा
सरकार का मानना है कि बुनियादी ढांचा विकास की गति से समझौता किए बिना सुरक्षा सुनिश्चित करना पहली प्राथमिकता है। रक्षा गलियारों और पर्वतीय क्षेत्रों में बन रही सुरंगें देश की सुरक्षा का अभिन्न अंग हैं। ऐसे में किसी भी ‘विदेशी हस्तक्षेप’ की गुंजाइश नहीं छोड़ी जा सकती। अब सरकारी टेंडरों में ऐसी शर्तों को जोड़ा जा रहा है जो यह सुनिश्चित करती हैं कि महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर ‘मेड इन इंडिया’ या किसी भरोसेमंद देश के हों।
निष्कर्ष
TBM शॉक ने भारत को यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीक के मामले में ‘आयात पर निर्भरता’ एक रणनीतिक कमजोरी है। चीन-प्रूफ इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को भी मजबूती प्रदान करेगा।
