30/07/2026

यूके से पीएचडी करने वाले छात्रों का रुझान अब विदेशों की ओर

हाल ही में ‘टाइम्स हायर एजुकेशन’ (THE) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट ने वैश्विक शिक्षा और रोजगार बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यूके के विश्वविद्यालयों से पीएचडी (PhD) पूरी करने वाले छात्र अब करियर के लिए केवल यूके के बाजार पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसरों की तलाश कर रहे हैं।

क्यों बढ़ रहा है विदेशों की ओर पलायन?

इस अध्ययन में कई ऐसे कारण सामने आए हैं जो पीएचडी धारकों को विदेश जाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पहला प्रमुख कारण प्रतिस्पर्धात्मक वेतन है। कई अन्य विकसित देशों की तुलना में, यूके में शोधकर्ताओं के लिए मिलने वाले वेतन में उतनी वृद्धि नहीं देखी गई है, जितनी वैश्विक स्तर पर अन्य बाजारों में देखी जा रही है।

इसके अतिरिक्त, शोध के अवसर भी एक बड़ा कारक हैं। छात्र अब उन देशों की ओर आकर्षित हो रहे हैं जहाँ फंडिंग अधिक है, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं उपलब्ध हैं और शोध कार्यों को बेहतर सम्मान मिलता है। अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों में बढ़ते शोध निवेश के कारण यूके के पीएचडी ग्रेजुएट्स के लिए विदेश में बेहतर करियर पथ खुले हैं।

ब्रेक्सिट और वीजा नीतियों का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेक्सिट के बाद यूके की बदलती नीतियों और वीजा संबंधी जटिलताओं ने भी शोधकर्ताओं के मन में एक अनिश्चितता पैदा की है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए यूके में रहने और काम करने की शर्तों में आए बदलावों के कारण, कई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहाँ ‘वर्क परमिट’ और ‘स्थायी निवास’ (PR) के नियम अधिक अनुकूल हैं।

शिक्षा जगत पर असर

यह प्रवृत्ति यूके के विश्वविद्यालयों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। यदि देश के शीर्ष शोधकर्ता विदेश पलायन करेंगे, तो यूके की ‘नॉलेज इकोनॉमी’ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यूके के विश्वविद्यालय अब प्रतिभाओं को बनाए रखने के लिए नई नीतियों और बेहतर करियर सलाह पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

निष्कर्ष

यह रिपोर्ट न केवल यूके के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह बदलते हुए वैश्विक शिक्षा परिदृश्य को भी दर्शाती है। आज का शोधकर्ता केवल एक देश तक सीमित नहीं है, वह अपने कौशल के लिए सर्वोत्तम वैश्विक बाजार की तलाश में है। यह आने वाले समय में देशों के बीच ‘टैलेंट वॉर’ को और अधिक तीव्र बना सकता है।

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