सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान: छात्रों की सुरक्षा के लिए जारी है संघर्ष
प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने एक बार फिर केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। लद्दाख के भविष्य और वहां के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अनशन पर बैठे वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि यदि केंद्र सरकार उन छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई वापस ले लेती है जिन्हें हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान नामजद किया गया है, तो वे अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।
क्या है पूरा मामला?
लद्दाख को छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और वहां के लोगों के लिए विशेष दर्जे की मांग को लेकर सोनम वांगचुक लंबे समय से आंदोलनरत हैं। इस दौरान दिल्ली और लद्दाख में कई प्रदर्शन हुए। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनों में भाग लेने वाले कई छात्रों पर कानूनी कार्रवाई की गई है, जिससे लद्दाख के युवाओं में भारी रोष है। वांगचुक का मानना है कि छात्रों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए और उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।
‘छात्रों का भविष्य सबसे ऊपर’
वांगचुक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरी लड़ाई लद्दाख के अधिकारों के लिए है, लेकिन मैं किसी भी छात्र का करियर बर्बाद होते नहीं देख सकता। सरकार अगर उन छात्रों के खिलाफ दर्ज केस हटा लेती है, तो मैं तुरंत अपना अनशन खत्म कर दूंगा।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे केवल लद्दाख के हितों की रक्षा चाहते हैं और सरकार के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्षधर हैं।
क्या केंद्र सरकार मानेगी मांग?
सोनम वांगचुक का यह कदम सरकार पर नैतिक दबाव बनाने की एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। लद्दाख के विकास और सुरक्षा को लेकर उनकी सक्रियता ने देश भर में सुर्खियां बटोरी हैं। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं कि क्या वे छात्रों के प्रति उदारता दिखाते हुए वांगचुक की मांग को स्वीकार करेंगे।
लद्दाख का मुद्दा क्यों है अहम?
लद्दाख एक संवेदनशील क्षेत्र है। वांगचुक का तर्क है कि लद्दाख की पारिस्थितिकी (Ecology) और संस्कृति को बचाने के लिए इसे छठी अनुसूची का संरक्षण मिलना अनिवार्य है। उनके इस अनशन ने लद्दाख के निवासियों को एक मंच पर लाने का काम किया है।
