अंटार्कटिका में दिखा ‘हमिंगबर्ड’: US-India NISAR मिशन का बड़ा कारनामा
हाल ही में, नासा (NASA) और इसरो (ISRO) के संयुक्त उपक्रम ‘निसार’ (NISAR) सैटेलाइट ने एक अविश्वसनीय डेटा साझा किया है। इस डेटा में अंटार्कटिका की बर्फ की चादरों के नीचे एक ‘हमिंगबर्ड’ पक्षी जैसी आकृति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। यह खोज न केवल वैज्ञानिकों के लिए आश्चर्य का विषय है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।
निसार (NISAR) सैटेलाइट क्या है?
NISAR का पूरा नाम ‘NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar’ है। यह दुनिया का पहला रडार इमेजिंग उपग्रह है जो पृथ्वी की सतह में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों को भी पकड़ने में सक्षम है। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के बदलते परिदृश्य, ग्लेशियरों के पिघलने की गति और टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल पर नजर रखना है।
बर्फ में छिपी ‘हमिंगबर्ड’ की आकृति
Phys.org की रिपोर्ट के अनुसार, निसार द्वारा भेजे गए डेटा का विश्लेषण करते समय वैज्ञानिकों ने पाया कि अंटार्कटिका के एक विशिष्ट क्षेत्र में बर्फ के प्रवाह के कारण एक पैटर्न बना है, जो देखने में बिल्कुल एक उड़ती हुई ‘हमिंगबर्ड’ जैसा लगता है। यह आकृति वास्तव में बर्फ की परतों के नीचे जमा हुए तरल पानी और बर्फ के घर्षण का परिणाम है।
जलवायु परिवर्तन और इस खोज का महत्व
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की आकृतियाँ हमें यह समझने में मदद करती हैं कि अंटार्कटिका के नीचे ‘सबग्लेशियल’ (Subglacial) नदियां कैसे बह रही हैं। यह खोज इस बात का संकेत है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण अंटार्कटिका की आंतरिक संरचना में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। निसार का रडार डेटा इस पूरी प्रक्रिया को बेहद बारीकी से मॉनिटर कर रहा है।
निष्कर्ष
US-India का यह साझा मिशन विज्ञान की दुनिया में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। निसार सैटेलाइट न केवल ऐसी अद्भुत आकृतियों को खोजने में मदद कर रहा है, बल्कि भविष्य में समुद्र के जलस्तर में होने वाली वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने के लिए भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर रहा है।
