नीट परीक्षा में धांधली पर के. अन्नामलाई का तीखा प्रहार
देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हाल ही में हुए नीट यूजी (NEET-UG) 2024 परीक्षा परिणामों के बाद देश भर में छात्रों और अभिभावकों का आक्रोश बढ़ गया है। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता के. अन्नामलाई ने परीक्षा प्रणाली की विफलता पर कड़ा रुख अपनाते हुए एनटीए (NTA) और मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
क्या बोले के. अन्नामलाई?
के. अन्नामलाई ने एनडीटीवी के साथ बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले 5 वर्षों में नीट का पेपर तीन बार लीक हुआ है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इस गंभीर विफलता के लिए किसी की जवाबदेही तय नहीं की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों का भविष्य दांव पर है और इस तरह की घटनाएं देश की शिक्षा प्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती हैं।
‘जवाबदेही का अभाव’ मुख्य मुद्दा
अन्नामलाई ने अपनी बात रखते हुए कहा, “सिर्फ परीक्षा आयोजित कर देना ही काफी नहीं है। जब भी पेपर लीक की खबरें आती हैं, तो छात्रों का भरोसा टूटता है। पांच साल में तीन बार ऐसी घटनाओं का होना यह दर्शाता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी खामियां हैं, जिन्हें सुधारने के बजाय नजरअंदाज किया जा रहा है।” उन्होंने मांग की कि इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
एनटीए (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल
एनटीए (National Testing Agency) पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी से इतनी बड़ी चूक बार-बार होना स्वीकार्य नहीं है। अन्नामलाई ने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए व्यापक बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लाखों छात्रों की मेहनत इस तरह की धांधली के कारण बेकार नहीं जानी चाहिए।
छात्रों के भविष्य के लिए चिंता
नीट परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करके तैयारी करते हैं। जब पेपर लीक या ग्रेस मार्क्स जैसे मुद्दे सामने आते हैं, तो यह सीधे तौर पर मेधावी छात्रों के अधिकारों का हनन है। के. अन्नामलाई का बयान इस बात का संकेत है कि अब राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर दबाव बढ़ रहा है और सरकार को इस दिशा में ठोस नीति बनाने की जरूरत है।
