ट्रम्प का बड़ा ऐलान: 2028 से जेनेरिक दवाओं के आयात पर लगेगा 100% टैरिफ
अमेरिकी राजनीति और वैश्विक व्यापार जगत में एक बड़ी हलचल के बीच, डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में घोषणा की है कि 2028 से अमेरिका में आयात की जाने वाली जेनेरिक दवाओं पर 100% का भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी फार्मास्युटिकल विनिर्माण को घरेलू स्तर पर बढ़ावा देना और विदेशी निर्भरता को कम करना है।
टैरिफ का क्या है मुख्य उद्देश्य?
ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि ‘मेक इन अमेरिका’ पहल को मजबूती देने के लिए यह आवश्यक है कि दवाइयों का उत्पादन भी अमेरिका के भीतर ही हो। वर्तमान में, अमेरिका अपनी जेनेरिक दवाओं की एक बड़ी आपूर्ति भारत और चीन जैसे देशों से करता है। 100% का आयात शुल्क लगाने से ये दवाएं अमेरिकी बाजार में काफी महंगी हो जाएंगी, जिससे स्थानीय निर्माताओं को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलने की उम्मीद है।
भारतीय फार्मा सेक्टर पर असर
भारत दुनिया भर में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। ऐसे में इस नीति का सीधा असर भारतीय दवा कंपनियों पर पड़ना तय है। Investing.com की रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह फैसला लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में अपनी पहुंच बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल मार्जिन पर दबाव पड़ेगा, बल्कि भारतीय कंपनियों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन केंद्रों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
वैश्विक बाजार में हलचल
इस घोषणा के बाद से ही वैश्विक फार्मा बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। जेनेरिक दवाएं आम जनता के लिए इलाज का सबसे सस्ता जरिया होती हैं। यदि इन पर 100% शुल्क लगता है, तो अमेरिका में स्वास्थ्य सेवा की लागत में भारी वृद्धि हो सकती है। आम अमेरिकी नागरिकों के लिए भी सस्ती दवाओं की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।
आगे की राह: क्या हैं विकल्प?
आगामी वर्षों में, दुनिया भर की दवा कंपनियां इस नीति के अनुकूल खुद को ढालने की कोशिश करेंगी। कुछ कंपनियां अमेरिका में ही अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने की योजना बना सकती हैं, जबकि कुछ अन्य देशों में अपने व्यापार को फैलाने का प्रयास करेंगी। हालांकि, 2028 तक का समय कंपनियों के पास अपनी रणनीति बदलने के लिए पर्याप्त है, लेकिन यह बदलाव आसान नहीं होगा।
