सोनम वांगचुक का 26 दिवसीय अनशन समाप्त, लेकिन संघर्ष जारी
पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख के प्रख्यात शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे अपने 26 दिनों के लंबे अनशन को समाप्त कर दिया है। लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर शुरू किया गया यह आंदोलन देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ था।
अनशन तोड़ने का कारण और सीजेपी की प्रतिक्रिया
सोनम वांगचुक के इस फैसले के बाद, ‘सीजेपी’ (CJP) के संस्थापक ने राहत की सांस ली है। उन्होंने वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए उनके इस कदम का स्वागत किया है। हालांकि, वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि अनशन तोड़ना उनकी लड़ाई का अंत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन किसी न किसी रूप में जारी रहेगा।
मांगें अभी भी बरकरार
वांगचुक का मुख्य उद्देश्य लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उनका मानना है कि लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी को बचाने के लिए स्थानीय लोगों को निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए। 26 दिनों तक भूखे रहकर उन्होंने सरकार पर अपनी मांगों को लेकर भारी दबाव बनाया है।
आगे की राह: आंदोलन का नया चरण
वांगचुक ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक पड़ाव है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि लद्दाख के लोगों की आवाज को अनसुना न किया जाए। अब आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें वे सरकार पर प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी बात मजबूती से रखेंगे। उनका जोर ‘प्रधान’ के इस्तीफे पर है, जिसे वे अपनी प्रशासनिक मांगों का एक बड़ा हिस्सा मानते हैं।
देश भर से मिला समर्थन
जंतर-मंतर पर पिछले कुछ हफ्तों से विभिन्न सामाजिक संगठनों, पर्यावरणविदों और आम नागरिकों का हुजूम उमड़ पड़ा था। लोग वांगचुक के संकल्प और सादगी से प्रेरित होकर उनके समर्थन में खड़े रहे। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार उनके इस संघर्ष पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया देती है या यह गतिरोध और लंबा खिंचेगा।
