कनाडा इमिग्रेशन रिपोर्ट: भारतीयों की संख्या में बड़ी गिरावट
कनाडा की इमिग्रेशन नीतियों में आए बदलावों का सीधा असर भारतीय प्रवासियों पर पड़ता दिख रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, कनाडा में नए स्थायी निवासियों (Permanent Residents) की संख्या में आई गिरावट में भारतीयों की हिस्सेदारी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट बताती है कि इस कमी में 57% योगदान केवल भारतीय नागरिकों का है।
क्या कहते हैं ताज़ा आंकड़े?
हंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में नए स्थायी निवासियों की संख्या में जो कमी देखी गई है, उसका सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय समुदाय पर पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में कनाडा भारतीयों के लिए पसंदीदा गंतव्य रहा है, लेकिन बदलती नीतियों और वर्क परमिट में सख्ती के कारण अब यह रुझान बदल रहा है। यह आंकड़ा कनाडा के श्रम बाजार और शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है।
गिरावट के मुख्य कारण
कनाडा सरकार ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय छात्रों और अस्थायी विदेशी श्रमिकों के लिए नियमों को सख्त किया है। इसके पीछे कई कारण हैं:
- आवास संकट: कनाडा में बढ़ते आवास संकट के कारण सरकार ने प्रवासियों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया है।
- महंगाई और रोजगार: बढ़ती महंगाई और नौकरियों की सीमित उपलब्धता के कारण इमिग्रेशन के लक्ष्यों को पुनर्गठित किया गया है।
- नीतिगत बदलाव: पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट और स्थायी निवास (PR) प्राप्त करने की कठिन शर्तों ने भारतीयों के लिए कनाडा जाना चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
भारतीय प्रवासियों पर असर
भारत से कनाडा जाने वाले छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए यह खबर चिंताजनक हो सकती है। जो लोग लंबे समय से PR का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए अब प्रक्रिया और भी जटिल हो गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कनाडा की यह ‘इमिग्रेशन कटौती’ आने वाले समय में कनाडा की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि भारतीय प्रवासी वहां के वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा हैं।
निष्कर्ष
कनाडा की बदलती इमिग्रेशन नीति न केवल भारतीयों के लिए, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो कनाडा में भविष्य तलाश रहे हैं। हालांकि, कनाडा का कहना है कि वे एक ‘संवहनीय और स्थिर’ प्रणाली की ओर बढ़ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले महीनों में यह आंकड़ा किस दिशा में जाता है।
