29/07/2026

असम में कुदरत का कहर: सब कुछ तबाह

पूर्वोत्तर भारत का राज्य असम इन दिनों एक भीषण प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से राज्य में पिछले कई वर्षों की सबसे विनाशकारी बाढ़ आई है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, हजारों लोगों ने अपने घर, खेत और मवेशी खो दिए हैं, और उनका कहना है कि इस बाढ़ ने उनसे उनका सब कुछ छीन लिया है।

बाढ़ से प्रभावित जनजीवन

असम के कई जिले जलमग्न हो चुके हैं। लाखों लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति इतनी गंभीर है कि सड़कों का नामोनिशान मिट चुका है और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी। फसलों के बर्बाद होने से किसानों की कमर टूट गई है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं।

प्रशासन और बचाव कार्य

राज्य और केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग (SDRF और NDRF) युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य चला रहे हैं। नावों के जरिए फंसे हुए लोगों को निकाला जा रहा है, और प्रभावितों तक भोजन, स्वच्छ पानी और दवाइयां पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, लगातार होती बारिश बचाव कार्यों में बड़ी बाधा बन रही है।

पर्यावरणीय चिंताएं और भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियोजित निर्माण कार्यों के कारण असम में बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ गई है। हर साल आने वाली यह आपदा राज्य के विकास को दशकों पीछे धकेल देती है। बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

निष्कर्ष

असम आज जिस त्रासदी से गुजर रहा है, वह संवेदनशील और गंभीर है। केंद्र और राज्य सरकार को न केवल तत्काल राहत की आवश्यकता है, बल्कि भविष्य के लिए दीर्घकालिक जल प्रबंधन नीतियों पर काम करने की भी सख्त जरूरत है ताकि इस वार्षिक तबाही को रोका जा सके।

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