होर्मुज के बाद ‘गेट ऑफ टियर्स’ संकट: वैश्विक व्यापार पर मंडराता खतरा
दुनिया एक बार फिर एक बड़े आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाद अब ‘बाबल-मंदेब’ (Bab-el-Mandeb), जिसे ‘गेट ऑफ टियर्स’ (आंसुओं का द्वार) भी कहा जाता है, वैश्विक व्यापार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। लाल सागर के प्रवेश द्वार पर स्थित यह जलडमरूमध्य विश्व की रसद आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
‘गेट ऑफ टियर्स’ क्यों महत्वपूर्ण है?
बाबल-मंदेब जलडमरूमध्य यमन और अफ्रीका के हॉर्न (जिबूती और इरिट्रिया) के बीच स्थित है। यह जलमार्ग स्वेज नहर के माध्यम से एशिया और यूरोप को जोड़ने वाली सबसे छोटी समुद्री कड़ी है। दुनिया का लगभग 12% समुद्री व्यापार इसी रास्ते से होता है। यदि इस मार्ग में कोई भी बाधा आती है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।
भारत के लिए क्यों है यह चिंता का विषय?
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेट ऑफ टियर्स’ पर बढ़ता तनाव कई स्तरों पर खतरे की घंटी है:
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। आपूर्ति में देरी या रुकावट का सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।
- निर्यात लागत: यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाला भारतीय माल अब लंबा रास्ता (केप ऑफ गुड होप के जरिए) तय करने को मजबूर है, जिससे माल ढुलाई का खर्च (Freight charges) बढ़ गया है।
- मुद्रास्फीति का डर: बढ़ती लॉजिस्टिक लागत अंततः उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण बनती है, जिससे भारतीय बाजारों में महंगाई बढ़ सकती है।
हूती हमले और भू-राजनीतिक अस्थिरता
यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा व्यापारिक जहाजों पर किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों ने इस क्षेत्र को एक युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है। होर्मुज के समान, यहाँ भी ‘चोकपॉइंट’ (Chokepoint) होने के कारण जहाजों को निशाना बनाना आसान हो गया है। अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा चलाए जा रहे सुरक्षा अभियानों के बावजूद, वैश्विक शिपिंग कंपनियों में असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
निष्कर्ष
भारत सरकार इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है। हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति बढ़ाना और वैकल्पिक व्यापार मार्गों की खोज करना भारत के लिए अब अनिवार्य हो गया है। ‘गेट ऑफ टियर्स’ का संकट यह स्पष्ट करता है कि वैश्विक व्यापार की सुरक्षा अब केवल एक देश की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की प्राथमिकता होनी चाहिए।
