29/07/2026

डॉ. एंथनी फौसी: महामारी के दौरान क्या कुछ हुआ?

अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फौसी वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान दुनिया के सबसे चर्चित चेहरों में से एक रहे। अब, उनकी निजी डायरी और ईमेल के जरिए कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं, जो उस दौर की कड़वी सच्चाई को बयां करते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फौसी की डायरी केवल वैज्ञानिक शोध तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें तत्कालीन राजनीतिक उथल-पुथल का भी जिक्र है।

1. ‘सेक्सिएस्ट मैन अलाइव’ का टैग

डॉ. फौसी ने अपनी डायरी में इस बात का जिक्र किया है कि उन्हें ‘पीपुल मैगजीन’ द्वारा ‘सेक्सिएस्ट मैन अलाइव’ (Sexiest Man Alive) के दावेदारों में शामिल किया गया था। यह खुलासा तब हुआ जब एक प्रसिद्ध कॉमेडियन ने उन्हें इस खिताब के लिए नामांकित किया। हालांकि, फौसी इसे लेकर काफी विनम्र रहे, लेकिन महामारी के तनाव के बीच यह एक हल्का-फुल्का और दिलचस्प पल था।

2. डोनाल्ड ट्रंप के साथ तनावपूर्ण संबंध

डायरी से साफ पता चलता है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और डॉ. फौसी के बीच तालमेल बिल्कुल नहीं था। फौसी ने लिखा है कि ट्रंप के साथ बैठकों में तनाव का माहौल रहता था, क्योंकि दोनों के नजरिए महामारी से निपटने को लेकर बिल्कुल अलग थे। फौसी ने कई मौकों पर विज्ञान को राजनीति से ऊपर रखने की कोशिश की, जो व्हाइट हाउस को पसंद नहीं आया।

3. व्हाइट हाउस का बढ़ता दबाव

डॉ. फौसी ने अपनी डायरी में दर्ज किया है कि उन पर व्हाइट हाउस से लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि वे महामारी के खतरों को कम करके बताएं। उन्हें चुप कराने या उनके बयानों को बदलने के लिए भी दवाब का सामना करना पड़ा। डायरी के पन्ने उस मानसिक द्वंद्व को दर्शाते हैं, जिसे उन्होंने वैज्ञानिक सत्य और राजनीतिक आदेशों के बीच महसूस किया।

4. मीडिया और जनता से जुड़ी चुनौतियां

महामारी के दौरान फौसी एक ‘स्टार’ बन गए थे, लेकिन इसके साथ ही उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिलने लगी थीं। डायरी में उन्होंने उल्लेख किया है कि कैसे उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा के लिहाज से चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनका मानना है कि गलत सूचनाओं (misinformation) ने वायरस से ज्यादा नुकसान पहुंचाया।

5. वैज्ञानिक शोध और अनिश्चितता का दौर

डायरी में यह भी दर्ज है कि कैसे वैज्ञानिक समुदाय अंधेरे में तीर चला रहा था। वायरस के बदलते स्वरूप और टीके के विकास को लेकर डॉ. फौसी की चिंताएं उनकी डायरी में साफ झलक्ती हैं। उन्होंने लिखा कि हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था और सही फैसले लेना बहुत मुश्किल था।

डॉ. एंथनी फौसी की यह डायरी केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि उस समय का आईना है जब पूरी दुनिया एक अभूतपूर्व संकट से जूझ रही थी। यह हमें याद दिलाती है कि कैसे विज्ञान और राजनीति का टकराव आम लोगों के जीवन को प्रभावित करता है।

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