21/07/2026

करगिल युद्ध का सच: जब पाकिस्तानी सेना ने अपनों को ही ठुकरा दिया

1999 के करगिल युद्ध को इतिहास के उन पन्नों में गिना जाता है जहाँ पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी। इस युद्ध के सालों बाद भी, पाकिस्तान के भीतर से ऐसे खुलासे होते रहे हैं जो वहां की सेना और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं। हाल ही में, पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनेता ने इस बात को फिर से हवा दी है कि कैसे करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने अपने ही शहीद सैनिकों के शवों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

क्या था पूरा मामला?

पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने अपने एक हालिया बयान में खुलासा किया कि 1999 के करगिल संघर्ष के दौरान, जब भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे धकेला और भारी नुकसान पहुंचाया, तो पाकिस्तान की सेना ने अपने सैनिकों के पार्थिव शरीर को लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल सैनिकों के परिवारों का अपमान हुआ, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान के लिए शर्मिंदगी का कारण बना।

‘सेना का दोहरा रवैया’

राजनेता ने कहा कि यह पाकिस्तान की सैन्य नीति का एक काला अध्याय है, जहां वे अपने रणनीतिक हितों के लिए सैनिकों का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन युद्ध के बाद उन्हें ‘बेगाना’ घोषित कर देते हैं। उनके अनुसार, यह उस समय के शीर्ष सैन्य नेतृत्व का फैसला था, जिसके कारण उन परिवारों को आज भी अपने प्रियजनों की अंतिम विदाई का संतोष नहीं मिल पाया है।

भारत की मानवीय पहल बनाम पाकिस्तान का इनकार

इसके विपरीत, भारतीय सेना ने हमेशा युद्ध के मैदान में भी मानवीय मूल्यों का पालन किया है। करगिल युद्ध के दौरान भी, भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी सैनिकों के शवों को सम्मानपूर्वक वापस भेजने की पेशकश की थी, जिसे पाकिस्तान की सेना ने यह कहकर ठुकरा दिया था कि वे उनके सैनिक ही नहीं हैं। यह खुलासा एक बार फिर साबित करता है कि पाकिस्तान की सेना ने किस तरह अपने ही जवानों के साथ विश्वासघात किया था।

निष्कर्ष

करगिल युद्ध के बाद से ही पाकिस्तान इस बात से इनकार करता रहा है कि उसने अपने नियमित सैनिकों को उस मोर्चे पर तैनात किया था। हालांकि, समय-समय पर उनके अपने नेताओं और पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा किए गए खुलासों ने इस झूठ की पोल खोल दी है। यह घटना न केवल पाकिस्तान की कूटनीतिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि उनके सैन्य ढांचे में मानवीय संवेदनशीलता की कमी को भी उजागर करती है।

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