पिकैक्स माउंटेन और कहूटा का अनसुलझा रहस्य
द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट ‘पिकैक्स माउंटेन’ (Pickaxe Mountain) के संदर्भ में फिर से उन पुराने सवालों को हवा दे रही है, जो दशकों से भारत की सुरक्षा नीति के गलियारों में दबे हुए थे। यह मुद्दा पाकिस्तान के कुख्यात कहूटा परमाणु संयंत्र से जुड़ा है, जहाँ से पाकिस्तान ने अपना परमाणु बम बनाने का सफर शुरू किया था।
कहूटा: परमाणु महत्वाकांक्षा का केंद्र
1970 और 80 के दशक में, जब पाकिस्तान डॉ. ए.क्यू. खान की देखरेख में कहूटा स्थित ‘खान रिसर्च लैबोरेटरीज’ (KRL) में यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया को अंजाम दे रहा था, तब भारत की खुफिया एजेंसियां और तत्कालीन नेतृत्व इस पर बारीक नजर रखे हुए थे। ‘पिकैक्स माउंटेन’ उस रणनीतिक योजना का कोडनेम माना जाता है, जिसमें भारत द्वारा पाकिस्तान के इस परमाणु ठिकाने को तबाह करने की संभावनाओं पर विचार किया गया था।
क्या भारत ने मौका गंवा दिया?
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 1980 के दशक की शुरुआत में भारत के सामने एक ऐसा अवसर था जब वह पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को उसके शुरुआती चरण में ही रोक सकता था। कई सैन्य विशेषज्ञों और खुफिया जानकारियों के अनुसार, इजरायल द्वारा इराक के ओसिरक परमाणु रिएक्टर पर किए गए ‘ऑपरेशन ओपेरा’ की तरह ही भारत के पास कहूटा पर स्ट्राइक करने की योजना थी।
हालाँकि, राजनीतिक अनिश्चितताओं, वैश्विक दबाव और तत्कालीन सुरक्षा परिस्थितियों के कारण यह ‘पिकैक्स माउंटेन’ योजना कभी धरातल पर नहीं आ सकी। आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो सवाल उठता है कि क्या उस समय की गई एक निर्णायक सैन्य कार्रवाई दक्षिण एशिया के परमाणु इतिहास को हमेशा के लिए बदल सकती थी?
रणनीतिक बहस का दौर
विशेषज्ञों का मानना है कि कहूटा को नष्ट करना न केवल तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था, बल्कि इसके गंभीर राजनयिक परिणाम भी हो सकते थे। उस समय शीत युद्ध का दौर था और अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश पाकिस्तान का समर्थन कर रहे थे। आज की परिस्थितियों में, ‘पिकैक्स माउंटेन’ का जिक्र हमें यह याद दिलाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के निर्णय कितने जटिल और दूरगामी होते हैं।
निष्कर्ष
पिकैक्स माउंटेन और कहूटा का इतिहास केवल पुरानी फाइलों का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह भविष्य की चुनौतियों को समझने का एक सबक है। आज का भारत अपनी सुरक्षा को लेकर जिस तरह से सतर्क है, वह शायद इसी तरह के ऐतिहासिक अनुभवों से उपजा है।
