NTA सुधार पैनल पर प्रियंका गांधी का हमला
नीट (NEET) परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और एनटीए (NTA) की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सरकार द्वारा एनटीए में सुधार के लिए गठित पैनल में आईआईटी मद्रास के निदेशक की नियुक्ति पर प्रियंका गांधी ने तंज कसते हुए उन्हें ‘गौ मूत्र एक्सपर्ट’ करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
केंद्र सरकार ने हाल ही में एनटीए के कामकाज को पारदर्शी बनाने और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन कर रहे हैं। हालांकि, इस पैनल में आईआईटी मद्रास के निदेशक की मौजूदगी पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। प्रियंका गांधी का मानना है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले विशेषज्ञों के बजाय सरकार ऐसे लोगों को तरजीह दे रही है जो उनकी विचारधारा से मेल खाते हैं।
प्रियंका गांधी का तीखा तंज
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए प्रियंका गांधी ने लिखा, ‘क्या देश की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ऐसे विशेषज्ञों की जरूरत है?’ उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह से पैनल में नियुक्तियां की जा रही हैं, वह हैरान करने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शैक्षणिक संस्थानों के शीर्ष पदों को केवल ‘गौ मूत्र’ और अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले लोगों से भरा जा रहा है, न कि योग्यता के आधार पर।
शिक्षा प्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल
नीट और नेट (NET) जैसी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के बाद से ही छात्र संगठन और विपक्ष सरकार के खिलाफ लामबंद हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, लेकिन सरकार समस्या की जड़ पर काम करने के बजाय केवल दिखावटी सुधार कर रही है। उनका दावा है कि जब तक संस्थानों की स्वायत्तता और उनकी वैज्ञानिक सोच बरकरार नहीं रहेगी, तब तक परीक्षाओं में पारदर्शिता लाना असंभव है।
सरकार का रुख
दूसरी ओर, शिक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि पैनल के सभी सदस्य अत्यधिक योग्य हैं और उनके पास संबंधित क्षेत्रों का गहरा अनुभव है। सरकार का तर्क है कि सुधार प्रक्रिया पूरी तरह से वैज्ञानिक है और इसका मकसद छात्रों के हितों की रक्षा करना है।
यह विवाद भारत में शिक्षा प्रणाली के राजनीतिकरण को एक बार फिर से सुर्खियों में ले आया है। देखना यह होगा कि इस समिति की सिफारिशें क्या बदलाव लाती हैं और क्या सरकार छात्रों का भरोसा जीत पाती है या नहीं।
