पंजाब फार्मेसी परीक्षा घोटाला: कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने उठाए गंभीर सवाल
पंजाब में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हाल ही में राज्य में फार्मेसी की परीक्षाओं में हुए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े (cheating racket) का खुलासा हुआ है। इस मामले ने न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं, बल्कि योग्य छात्रों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक परगट सिंह ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब में आयोजित फार्मेसी परीक्षाओं में नकल करने और फर्जी तरीके से डिग्री हासिल करने का एक संगठित रैकेट सामने आया है। परीक्षा केंद्रों में बड़े पैमाने पर धांधली और उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़ की खबरें सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। परगट सिंह ने इस बात पर जोर दिया है कि यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो राज्य के स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचे को नुकसान पहुंचा रहा है।
परगट सिंह की प्रमुख मांगें
पूर्व हॉकी ओलंपियन और कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने सरकार से तत्काल प्रभाव से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि:
- इस पूरे रैकेट की निष्पक्ष और गहन जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
- दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और निजी संस्थानों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
- परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और सुरक्षित बनाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
शिक्षा प्रणाली पर उठते सवाल
फार्मेसी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि नकल या फर्जी डिग्री के माध्यम से छात्र पास होते हैं, तो यह सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। यदि ऐसे फर्जी डिग्री धारक दवा वितरण या स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल होते हैं, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं। परगट सिंह ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो राज्य की साख को भारी नुकसान पहुंचेगा।
निष्कर्ष
फार्मेसी परीक्षा में सामने आया यह रैकेट शिक्षा माफियाओं और भ्रष्ट सिस्टम के गठजोड़ को दर्शाता है। परगट सिंह की यह मांग न केवल विपक्षी नेता के तौर पर है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर भी है जो राज्य की शैक्षणिक गुणवत्ता को बचाना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि पंजाब सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या छात्रों को न्याय मिल पाता है या नहीं।
