RAF ने माना: जंतर-मंतर पर हुआ अत्यधिक बल का प्रयोग
हाल ही में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के प्रमुख ने स्वीकार किया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान ‘अत्यधिक बल’ का प्रयोग किया गया था। इस स्वीकारोक्ति ने सुरक्षा बलों के व्यवहार और भीड़ नियंत्रण के तरीकों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला?
जंतर-मंतर, जिसे भारत में लोकतंत्र का केंद्र माना जाता है, अक्सर विभिन्न आंदोलनों का गवाह बनता है। हालिया प्रदर्शनों के दौरान, सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात RAF पर प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरतने के आरोप लगे थे। इन आरोपों की जांच और समीक्षा के बाद, RAF प्रमुख ने माना कि स्थिति को संभालने के लिए बल का उपयोग उसकी निर्धारित सीमा से अधिक था।
पैलेट गन और इलेक्ट्रिक हथियारों पर पूर्ण प्रतिबंध
इस घटना के बाद, प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए जंतर-मंतर क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण के लिए कुछ विवादास्पद उपकरणों के उपयोग पर रोक लगा दी है। अब भविष्य में वहां:
- पैलेट गन (Pellet Guns): इनका उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है, क्योंकि ये गंभीर चोटें पहुंचा सकती हैं।
- इलेक्ट्रिक शॉक हथियार: टेजर गन या इलेक्ट्रिक शॉक देने वाले उपकरणों का इस्तेमाल अब जंतर-मंतर पर नहीं किया जाएगा।
यह निर्णय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज की मांग के बाद लिया गया है, जो लंबे समय से शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान पुलिसिया सख्ती को कम करने की वकालत कर रहे थे।
सुरक्षा बलों के लिए नया प्रोटोकॉल
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में RAF को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे प्रदर्शनकारियों के साथ ‘संवेदनशीलता’ के साथ व्यवहार कर सकें। बल का उपयोग केवल अंतिम विकल्प के रूप में किया जाना चाहिए, न कि पहले विकल्प के रूप में। सुरक्षा बलों को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों या अन्य गैर-घातक और नियंत्रित तरीकों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष
RAF प्रमुख की यह स्वीकारोक्ति एक सकारात्मक कदम है, जो पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में संकेत देती है। लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, और सुरक्षा बलों का काम उन्हें नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जंतर-मंतर पर लिया गया यह निर्णय एक नजीर के रूप में काम करेगा।
