क्या भारतीय रुपया वास्तव में कमजोर है?
हाल के दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की चाल को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कुछ संकेतों और बयानों से यह स्पष्ट होता है कि केंद्रीय बैंक भारतीय रुपये को उसकी वास्तविक क्षमता से कम यानी ‘अंडरवैल्यूड’ (Undervalued) मानता है। लेकिन यह सवाल उठता है कि एक तरफ रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट देख रहा है, वहीं आरबीआई ऐसा क्यों सोचता है?
‘अंडरवैल्यूड’ होने का अर्थ क्या है?
जब किसी देश की मुद्रा का मूल्य बाजार में उसकी वास्तविक क्रय शक्ति या आर्थिक स्थिति की तुलना में कम होता है, तो उसे ‘अंडरवैल्यूड’ कहा जाता है। सरल शब्दों में, यदि बाजार दर यह संकेत दे रही है कि रुपया कमजोर है, जबकि भारत की आर्थिक बुनियाद (Fundamentals) मजबूत है, तो आरबीआई का मानना है कि बाजार रुपये का गलत मूल्यांकन कर रहा है।
आरबीआई का नजरिया और तर्क
आरबीआई का यह रुख कई कारकों पर टिका है:
- मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार: भारत के पास पर्याप्त फॉरेक्स रिजर्व है, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने और रुपये की अस्थिरता को रोकने में मदद करता है।
- आर्थिक विकास दर: दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की जीडीपी ग्रोथ दर काफी बेहतर है। आरबीआई का मानना है कि मजबूत विकास दर का असर धीरे-धीरे मुद्रा पर दिखना चाहिए।
- मुद्रास्फीति का प्रबंधन: आरबीआई ने महंगाई को काबू में रखने के लिए सख्त मौद्रिक नीतियां अपनाई हैं, जो अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाती हैं।
- निर्यात और व्यापार संतुलन: हालांकि व्यापार घाटा चिंता का विषय रहा है, लेकिन सेवाओं के निर्यात में भारत का प्रदर्शन लगातार मजबूत बना हुआ है।
बाजार की धारणा बनाम वास्तविकता
बाजार में रुपये की गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव है। निवेशक अक्सर अनिश्चितता के दौर में डॉलर को सुरक्षित मानते हैं। आरबीआई का मानना है कि यह गिरावट फंडामेंटल कारणों से कम और ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट्स के कारण अधिक है। इसलिए, जब बाजार का शोर थमेगा, तो रुपया अपनी वास्तविक कीमत पर वापस लौटेगा।
निष्कर्ष
आरबीआई का ‘अंडरवैल्यूड’ कहना इस बात का संकेत है कि वह रुपये में अत्यधिक गिरावट को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, बाजार की ताकतें हमेशा केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन आरबीआई का यह रुख निवेशकों में विश्वास जगाने का एक माध्यम है कि भारतीय अर्थव्यवस्था लंबे समय में मजबूत रहेगी।
