29/07/2026

देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का 70 साल की उम्र में निधन

बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता देव आनंद के इकलौते बेटे सुनील आनंद का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। सुनील आनंद ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए कुछ फिल्मों में अभिनय किया और निर्देशन के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया था। उनके निधन की खबर ने पूरे बॉलीवुड में शोक की लहर पैदा कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जटिलताओं ने उन्हें असमय हमसे दूर कर दिया। इस दुखद घटना ने एक बार फिर से ‘हार्ट हेल्थ’ और कार्डियक अरेस्ट जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा छेड़ दी है।

दूसरा हार्ट अटैक क्यों होता है अधिक घातक?

अक्सर मेडिकल विशेषज्ञ यह चेतावनी देते हैं कि पहला हार्ट अटैक झेलने के बाद दूसरा अटैक आने की संभावना और उसका जोखिम कहीं अधिक बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि यह स्थिति इतनी खतरनाक क्यों होती है:

1. हृदय की मांसपेशियों की कमजोरी

पहले हार्ट अटैक के दौरान हृदय की मांसपेशियों को जो नुकसान पहुंचता है, वे पूरी तरह से ठीक नहीं हो पातीं। घाव के निशान (Scar tissue) बन जाने के कारण हृदय की पंपिंग क्षमता कम हो जाती है। जब दोबारा दिल का दौरा पड़ता है, तो पहले से कमजोर दिल पर इसका प्रभाव बहुत अधिक पड़ता है।

2. धमनियों का सिकुड़ना

हार्ट अटैक का मुख्य कारण कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज होना है। यदि पहली बार के बाद जीवनशैली में बदलाव नहीं किए जाते, तो कोलेस्ट्रॉल और प्लाक का जमाव जारी रहता है, जिससे दूसरी बार अटैक की स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है।

3. इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन

दिल का दौरा पड़ने से हृदय की विद्युत प्रणाली (Electrical system) प्रभावित होती है, जिससे रिदम (लय) बिगड़ने का खतरा रहता है। दूसरी बार के हमले में हृदय के अचानक बंद होने (Sudden Cardiac Arrest) की संभावना अधिक होती है।

बचाव के तरीके और सावधानियां

डॉक्टरों का कहना है कि हृदय संबंधी समस्याओं से बचने के लिए नियमित जांच बहुत जरूरी है। 40 की उम्र के बाद हृदय की स्क्रीनिंग जरूर करवानी चाहिए। इसके अलावा:

  • स्वस्थ आहार: नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट का सेवन सीमित करें।
  • नियमित व्यायाम: रोजाना 30 मिनट की वॉक या योगा करें।
  • तनाव प्रबंधन: स्ट्रेस हार्ट अटैक का एक बड़ा कारण है, इसलिए मेडिटेशन का सहारा लें।
  • नियमित चेकअप: बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल की समय-समय पर जांच कराएं।

सुनील आनंद का निधन हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

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