यूक्रेन युद्ध के बीच बड़ा उलटफेर: सेना प्रमुख की छुट्टी
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध के बीच यूक्रेन से एक बड़ी खबर सामने आई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने अपने सेना प्रमुख वालेरी ज़ालुज़नी (Valerii Zaluzhnyi) को पद से हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन की सेना मोर्चे पर कड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है और देश के भीतर सैन्य नेतृत्व को लेकर चर्चाएं गर्म थीं।
कौन हैं वालेरी ज़ालुज़नी?
जनरल वालेरी ज़ालुज़नी यूक्रेन की सेना के बेहद लोकप्रिय और सम्मानित कमांडर माने जाते थे। उन्हें ‘आयरन जनरल’ के नाम से भी जाना जाता था। साल 2022 में रूस के आक्रमण के बाद यूक्रेन की रक्षा रणनीति तैयार करने और रूसी सेना को राजधानी कीव से पीछे खदेड़ने में ज़ालुज़नी की भूमिका अहम रही थी।
बदलाव की मुख्य वजह
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस बदलाव के पीछे ‘सैन्य नेतृत्व को नई दिशा देने’ की बात कही है। पिछले कुछ महीनों से जेलेंस्की और ज़ालुज़नी के बीच कथित तौर पर मतभेद की खबरें सामने आ रही थीं। माना जा रहा है कि युद्ध की रणनीति और सैन्य लामबंदी (mobilization) को लेकर दोनों के विचारों में तालमेल नहीं बैठ रहा था। यूक्रेनी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेलेंस्की प्रशासन का मानना है कि अब युद्ध के अगले चरण के लिए एक नई सोच और नई ऊर्जा की आवश्यकता है।
आगे की राह: ओलेक्जेंडर सिर्स्की को मिली कमान
ज़ालुज़नी की जगह अब ओलेक्जेंडर सिर्स्की (Oleksandr Syrskyi) को यूक्रेन की सेना का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। सिर्स्की पहले यूक्रेन के जमीनी बलों (Ground Forces) के कमांडर थे। उन्होंने कीव के सफल बचाव और खारकीव में जवाबी हमले जैसे महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सिर्स्की के नेतृत्व में यूक्रेन युद्ध की गतिशीलता में कोई बड़ा बदलाव ला पाएगा या नहीं।
युद्ध पर इसका असर
विश्लेषकों का मानना है कि सेना प्रमुख को हटाना एक जोखिम भरा कदम है, क्योंकि ज़ालुज़नी न केवल सेना में बल्कि आम जनता के बीच भी अत्यधिक लोकप्रिय हैं। युद्ध के बीच में हुए इस बदलाव से मनोबल पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, जेलेंस्की का कहना है कि यह निर्णय सेना के आधुनिकीकरण और युद्ध में जीत हासिल करने के लिए अनिवार्य था।
यूक्रेन के लिए आने वाला समय बेहद नाजुक है। पश्चिमी देशों से मिलने वाली सैन्य सहायता और रूसी आक्रमण का सामना करने के लिए अब नए सैन्य नेतृत्व को अपनी कार्यक्षमता साबित करनी होगी।
