
लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक, पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आमरण अनशन के 21वें दिन स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक भोजन न लेने और शरीर में पानी की कमी के कारण उनकी स्थिति कमजोर हो गई थी। उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। उनका आंदोलन हाल के परीक्षा विवादों, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों को लेकर चल रहे अभियान से जुड़ा हुआ है। समय बीतने के साथ उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई, जिसके बाद चिकित्सकों ने तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी।
लगातार गिरती सेहत बनी चिंता का विषय
डॉक्टरों ने बताया कि लंबे उपवास के कारण उनके शरीर का वजन तेजी से घटा है और डिहाइड्रेशन की स्थिति भी गंभीर हो गई थी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल उनकी हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें लगातार निगरानी और उपचार की आवश्यकता है। दूसरी ओर, उनके परिवार ने उपचार के कुछ पहलुओं को लेकर अपनी चिंता भी व्यक्त की है।
समर्थकों में नाराजगी
वांगचुक को अस्पताल ले जाने के दौरान जंतर-मंतर पर मौजूद समर्थकों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। प्रदर्शन स्थल को खाली कराया गया, जिस पर विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए। वहीं, आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
पर्यावरण और शिक्षा सुधार की पहचान
सोनम वांगचुक केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि नवाचार और शिक्षा सुधार के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय पहचान रखते हैं। लद्दाख में SECMOL की स्थापना, ‘आइस स्तूप’ परियोजना और हिमालयी क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रयासों ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। आमिर खान की फिल्म 3 Idiots के लोकप्रिय किरदार ‘फुंसुख वांगड़ू’ की प्रेरणा भी काफी हद तक उनके जीवन से जुड़ी मानी जाती है।
सोशल मीडिया पर समर्थन
वांगचुक के अस्पताल पहुंचने की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। कई शिक्षाविदों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और छात्रों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। साथ ही आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की मांग भी तेज हुई है।
आगे क्या?
अस्पताल प्रशासन लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यदि उनकी तबीयत में सुधार होता है तो आगे की रणनीति पर उनके सहयोगियों और परिवार की बैठक हो सकती है। फिलहाल पूरे देश की निगाहें इस बात पर हैं कि उनके स्वास्थ्य में कितनी जल्दी सुधार होता है और आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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