22/07/2026

क्या दुनिया एक और बड़े समुद्री संकट की ओर बढ़ रही है?

दुनिया भर में व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर मंडराते संकट कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाद अब ‘बाब-अल-मंडेब’ (Bab-el-Mandeb), जिसे ‘गेट ऑफ टियर्स’ (Gate of Tears) भी कहा जाता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। लाल सागर के प्रवेश द्वार पर स्थित यह संकरा मार्ग वैश्विक तेल और कंटेनर शिपिंग के लिए लाइफलाइन है।

‘गेट ऑफ टियर्स’ क्यों चर्चा में है?

बाब-अल-मंडेब का अर्थ होता है ‘आंसुओं का द्वार’। आज की भू-राजनीतिक स्थिति में, यह नाम सच साबित होता दिख रहा है। हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर किए जा रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया है। जब जहाज इस मार्ग को छोड़कर अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर गुजरते हैं, तो यात्रा का समय और लागत, दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं।

भारत के लिए चिंता का विषय क्यों?

भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। भारत का अधिकांश व्यापार यूरोप और उत्तरी अमेरिका के साथ इसी समुद्री मार्ग से होता है।

1. आयात-निर्यात लागत में वृद्धि

समुद्री मार्ग लंबा होने के कारण माल ढुलाई (Freight) की लागत बढ़ रही है। इसका सीधा असर भारत से होने वाले निर्यात और आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। विशेष रूप से कृषि उत्पादों और ऑटोमोबाइल घटकों के निर्यात पर इसका नकारात्मक प्रभाव दिख सकता है।

2. ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा

हालांकि भारत का कच्चा तेल हॉर्मुज के माध्यम से आता है, लेकिन परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों (Refined Petroleum Products) का निर्यात यूरोप को इसी मार्ग से होता है। आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आने से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता आ सकती है।

3. महंगाई का डर

लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि का मतलब है कि अंततः उपभोक्ताओं को सामान के लिए अधिक पैसे चुकाने होंगे। भारत में महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए समुद्री व्यापार का निर्बाध रहना अनिवार्य है।

भारतीय नौसेना की भूमिका

इस संकट के बीच, भारतीय नौसेना ने ‘मिशन-आधारित तैनाती’ के तहत अरब सागर और लाल सागर के आसपास अपनी उपस्थिति मजबूत की है। समुद्री डकैती और हमलों को रोकने के लिए भारतीय युद्धपोतों की गश्त बढ़ाई गई है, जो यह दर्शाता है कि भारत एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में अपनी व्यापारिक धमनियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

निष्कर्ष

हॉर्मुज हो या बाब-अल-मंडेब, समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव ने यह साबित कर दिया है कि वैश्वीकरण के युग में दुनिया एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी हुई है। भारत को अपनी आर्थिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जरिए इस संकट का समाधान खोजने के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करना होगा। आने वाला समय समुद्री सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहने का है।

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