अंतरराष्ट्रीय कानून में ‘असैनिक’ (Civilian) स्थल क्या हैं?
युद्ध और संघर्ष के दौरान, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law) यह सुनिश्चित करता है कि युद्ध की विभीषिका आम नागरिकों को कम से कम प्रभावित करे। इसके केंद्र में ‘असैनिक स्थल’ या ‘सिविलियन साइट्स’ की अवधारणा है। जेनेवा कन्वेंशन के अनुसार, असैनिक वस्तुएं वे होती हैं जो सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं की जा रही हैं। इनमें घर, स्कूल, अस्पताल, धार्मिक स्थल और नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे बिजली ग्रिड या जल आपूर्ति प्रणाली शामिल हैं।
कानून के तहत, युद्धरत पक्षों को सैन्य लक्ष्यों और असैनिक लक्ष्यों के बीच स्पष्ट अंतर करना अनिवार्य है। केवल उन स्थानों को ही निशाना बनाया जा सकता है जो प्रत्यक्ष रूप से सैन्य कार्रवाई में योगदान दे रहे हैं। किसी भी असैनिक स्थल पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन और ‘युद्ध अपराध’ की श्रेणी में आता है।
अमेरिका और ईरान संघर्ष: निशाना कहाँ लगा?
हाल के वर्षों में मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा है। अल जजीरा की रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों ने एक-दूसरे के प्रॉक्सी समूहों और सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। हालांकि, चिंता का विषय यह है कि कई बार ये हमले उन क्षेत्रों के करीब हुए हैं जिन्हें ‘असैनिक’ माना जाता है।
क्या सैन्य ठिकाने ‘असैनिक’ बन सकते हैं?
कानून में एक ग्रे एरिया तब आता है जब कोई देश किसी स्कूल या अस्पताल का उपयोग सैन्य उद्देश्यों (जैसे हथियार छिपाना या निगरानी पोस्ट बनाना) के लिए करता है। यदि कोई असैनिक इमारत सैन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की जाती है, तो वह अपना ‘सुरक्षित दर्जा’ खो सकती है। हालांकि, हमला करने वाले पक्ष को फिर भी ‘आनुपातिकता’ (Proportionality) का पालन करना होता है, ताकि कम से कम आम नागरिक हताहत हों।
संघर्ष में नागरिक हताहतों का बढ़ता जोखिम
अमेरिका ने अक्सर ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि ईरान ने इराक और सीरिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी इलाकों में इन हमलों के कारण ‘कोलेटरल डैमेज’ (Collateral Damage) का खतरा बढ़ जाता है, जहां असैनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचना अपरिहार्य हो जाता है।
निष्कर्ष
अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना युद्धरत देशों की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। असैनिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभ्यता की निशानी है। जैसे-जैसे वैश्विक तनाव बढ़ रहा है, अंतरराष्ट्रीय निकायों के लिए यह आवश्यक है कि वे युद्ध के दौरान असैनिक जीवन की रक्षा के लिए और अधिक सख्त मापदंड लागू करें।
