मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर: अमेरिका ने ईरान समर्थित ठिकानों पर जारी रखा सैन्य अभियान
दुनिया भर की नजरें इस समय मध्य-पूर्व पर टिकी हुई हैं, जहां अमेरिका और ईरान समर्थित समूहों के बीच संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर लगातार 11वीं रात हवाई हमले किए हैं। यह सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने और अमेरिकी सैनिकों पर हो रहे हमलों का जवाब देने के उद्देश्य से की गई है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने पुष्टि की है कि पिछले 11 दिनों से लगातार किए जा रहे ये हवाई हमले, इराक और सीरिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में, इन क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले बढ़े हैं, जिसके लिए वाशिंगटन सीधे तौर पर ईरान समर्थित प्रॉक्सी समूहों को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
क्यों हो रहे हैं ये हमले?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सैन्य अभियान एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अमेरिका का स्पष्ट संदेश है कि यदि उनके सैनिकों या ठिकानों को निशाना बनाया गया, तो वे इसका ‘सटीक और कठोर’ जवाब देंगे। वहीं, ईरान का कहना है कि ये हमले क्षेत्र की स्थिरता को बिगाड़ रहे हैं और अमेरिका की उपस्थिति ही इस तनाव की मुख्य जड़ है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव
लगातार 11 रातों से जारी इन हमलों ने वैश्विक समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने अपील की है कि दोनों पक्ष संयम बरतें ताकि स्थिति युद्ध में न बदल जाए। विश्लेषकों के अनुसार, यदि ये हमले जारी रहते हैं, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्ग, विशेष रूप से लाल सागर और फारस की खाड़ी पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
वर्तमान में, अमेरिकी रक्षा विभाग ने इन ऑपरेशंस की अवधि या भविष्य की योजनाओं पर अधिक जानकारी साझा नहीं की है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि अमेरिका अपनी रक्षा नीति में कोई ढील देने के मूड में नहीं है। दुनिया अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या ईरान और अमेरिका के बीच का यह ‘परोक्ष युद्ध’ (Proxy War) किसी बड़े टकराव का रूप लेगा या कूटनीतिक स्तर पर इसे शांत किया जा सकेगा।
