ममूटी का बॉक्स ऑफिस: 4 नेशनल अवार्ड्स, फिर भी 100 करोड़ की फिल्म क्यों नहीं?
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी बेहतरीन अभिनय की बात होती है, तो ममूटी का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके ममूटी ने दशकों से दर्शकों के दिलों पर राज किया है। हालांकि, एक हैरान करने वाली बात यह है कि ममूटी की अब तक कोई भी फिल्म 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार नहीं कर पाई है। आज हम विश्लेषण करेंगे कि आखिर क्या कारण है कि ‘मेगास्टार’ का बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड उनके अभिनय कौशल से अलग नजर आता है।
क्या ममूटी ने कभी ‘100 करोड़’ के लिए प्रयास नहीं किया?
ममूटी का करियर ग्राफ यह बताता है कि उन्होंने हमेशा ‘कमर्शियल सफलता’ से अधिक ‘किरदार की गहराई’ को महत्व दिया है। वे ऐसी फिल्में चुनना पसंद करते हैं जो सामाजिक मुद्दों, मानवीय संवेदनाओं या प्रयोगधर्मी कहानी पर आधारित हों। ‘पेरुमचालकन’, ‘ओरु वडक्कन वीरगाथा’ जैसी फिल्मों से लेकर हालिया ‘काथल: द कोर’ तक, ममूटी ने हमेशा लीक से हटकर काम किया है।
मल्यालम सिनेमा का दायरा और बॉक्स ऑफिस
एक बड़ा कारण यह भी है कि मल्यालम सिनेमा का बाजार अन्य भाषाओं (जैसे तमिल या तेलुगु) की तुलना में छोटा है। हालांकि, ‘दृश्यम’ या ‘2018’ जैसी फिल्मों ने 100 करोड़ का जादुई आंकड़ा पार किया है, लेकिन ये फिल्में ज्यादातर बड़े पैमाने पर बनी थ्रिलर या पैन-इंडिया रिलीज थीं। ममूटी ने अब तक ‘बड़े बजट के मास एंटरटेनर’ के बजाय ‘इंटेलेक्चुअल सिनेमा’ पर ध्यान केंद्रित किया है।
क्या ममूटी की प्राथमिकताएं बदल रही हैं?
पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि ममूटी अब ‘भष्मम’ और ‘टर्बो’ जैसी फिल्मों के जरिए मास अपील की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन ममूटी का मुख्य आकर्षण हमेशा से उनका अभिनय रहा है। उनके प्रशंसक उन्हें ‘सुपरस्टार’ के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘महान अभिनेता’ के रूप में देखना पसंद करते हैं।
निष्कर्ष
ममूटी के लिए बॉक्स ऑफिस के आंकड़े कभी भी उनके काम का पैमाना नहीं रहे। उनका 4 राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अभिनय की दुनिया में जो कीर्तिमान स्थापित किए हैं, उन्हें करोड़ों के आंकड़े से नहीं मापा जा सकता। वे भारतीय सिनेमा के उस दुर्लभ रत्न हैं, जिनके लिए ‘स्क्रिप्ट’ हमेशा ‘सक्सेस’ से बड़ी रही है।
