पंजाब की राजनीति में उबाल: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
पंजाब में एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग कर दी है। इस मांग ने राज्य की ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) सरकार के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी का आरोप है कि शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं और स्कूलों की बदहाली के कारण मंत्री को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
क्या है बीजेपी का आरोप?
बीजेपी नेताओं का कहना है कि पंजाब के सरकारी स्कूलों की हालत में सुधार का दावा करने वाली सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने मंत्री हरजोत सिंह बैंस पर शिक्षा के स्तर को गिराने और विभागीय कार्यों में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी का तर्क है कि ‘शिक्षा क्रांति’ के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है और जमीनी स्तर पर स्थितियां बेहद चिंताजनक हैं।
भगवंत मान का तीखा पलटवार
विपक्ष के इन हमलों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान चुप नहीं रहे। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह केवल एक राजनीतिक स्टंट है। भगवंत मान ने कहा, “बीजेपी के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए हमारे मंत्रियों को निशाना बना रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनकी सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए ऐतिहासिक काम किए हैं। उन्होंने स्कूलों के कायाकल्प, नए शिक्षकों की भर्ती और स्मार्ट क्लासरूम जैसी सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब दिया जाएगा।
राज्य में सियासी खींचतान के मायने
पंजाब की राजनीति में यह कोई पहला मौका नहीं है जब शिक्षा विभाग चर्चा का केंद्र बना हो। पिछले कुछ समय से ‘आप’ सरकार और विपक्षी दलों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार तनातनी बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष इसे जनता के बीच एक-दूसरे की छवि बिगाड़ने के मौके के तौर पर देख रहे हैं।
फिलहाल, देखना यह होगा कि क्या बीजेपी का यह दबाव मुख्यमंत्री भगवंत मान के स्टैंड को बदल पाएगा, या फिर सरकार अपने मंत्री के समर्थन में पूरी मजबूती के साथ खड़ी रहेगी।
