30/07/2026

पिकैक्स माउंटेन: इतिहास के पन्नों से एक अनसुलझा सवाल

हाल ही में ‘पिकैक्स माउंटेन’ (Pickaxe Mountain) ऑपरेशन का जिक्र फिर से सुर्खियों में है। यह ऑपरेशन भारत द्वारा पाकिस्तान के कहूटा स्थित परमाणु संयंत्र को नष्ट करने की कथित योजना से जुड़ा है। दशकों बाद भी यह सवाल रक्षा विशेषज्ञों और इतिहासकारों के बीच बहस का विषय बना हुआ है कि क्या उस समय भारत के पास पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए खत्म करने का अवसर था?

कहूटा परमाणु संयंत्र: पाकिस्तान की महत्वाकांक्षा

1970 के दशक के अंत में, जब पाकिस्तान ने ए.क्यू. खान के नेतृत्व में परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए, तो उसका केंद्र बिंदु ‘कहूटा रिसर्च लैबोरेटरीज’ था। भारतीय खुफिया एजेंसियों को उस समय इस बात की भनक लग चुकी थी कि पाकिस्तान चुपचाप परमाणु बम बनाने की तकनीक हासिल कर रहा है। कहूटा ही वह स्थान था जहाँ यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) का कार्य किया जा रहा था।

क्या भारत हमला कर सकता था?

कई सुरक्षा विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों का मानना है कि उस दौर में भारत के पास कहूटा पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ या हवाई हमले का विकल्प मौजूद था। चर्चा यह है कि भारतीय वायुसेना उस समय इस तरह के ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए तैयार थी। हालांकि, राजनीतिक अनिर्णय और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाओं ने इस फैसले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

पिकैक्स माउंटेन की सच्चाई

पिकैक्स माउंटेन ऑपरेशन के बारे में कहा जाता है कि यह एक सोची-समझी सैन्य योजना थी, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान की परमाणु क्षमता को ‘शून्य’ करना था। लेकिन रणनीतिक संयम (Strategic Restraint) की नीति के कारण इसे कभी हरी झंडी नहीं मिली। आलोचकों का तर्क है कि यदि उस समय कहूटा पर हमला कर दिया गया होता, तो आज दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पूरी तरह भिन्न होती और परमाणु हथियारों की होड़ को रोका जा सकता था।

निष्कर्ष

इतिहास के पन्नों में पिकैक्स माउंटेन एक ‘क्या होता अगर’ (What if) वाला सवाल बनकर रह गया है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के बीच का संतुलन कितना नाजुक होता है। आज के दौर में, जब पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम काफी परिपक्व हो चुका है, यह पुरानी बहस केवल एक सबक की तरह है कि सही समय पर लिया गया कूटनीतिक और सैन्य निर्णय भविष्य की दिशा बदल सकता है।

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