तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने NEET के खिलाफ छेड़ा मोर्चा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग दोहराई है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, स्टालिन ने कहा कि NEET परीक्षा का वर्तमान स्वरूप सामाजिक न्याय के खिलाफ है और यह गरीब व ग्रामीण छात्रों के लिए एक बाधा है।
NEET पर स्टालिन का कड़ा रुख
मुख्यमंत्री स्टालिन का मानना है कि NEET परीक्षा से राज्य के उन होनहार छात्रों को नुकसान हो रहा है, जो सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा राज्य का विषय है और NEET को थोपना संघीय ढांचे (Federal Structure) के सिद्धांतों का उल्लंघन है। स्टालिन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस प्रवेश परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करे।
राहुल गांधी की हिरासत पर कड़ी प्रतिक्रिया
NEET के मुद्दे के अलावा, स्टालिन ने नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की हिरासत पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। स्टालिन ने कहा, ‘विरोध करना और अपनी बात रखना एक लोकतांत्रिक अधिकार है। सरकार द्वारा विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए हिरासत का सहारा लेना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।’
विपक्ष की एकजुटता और केंद्र पर दबाव
स्टालिन ने कहा कि जिस तरह से केंद्र सरकार NEET और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर मनमानी कर रही है, उसके खिलाफ विपक्ष को एक साथ आना होगा। उन्होंने राहुल गांधी के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा कि तमिलनाडु सरकार छात्रों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।
निष्कर्ष
NEET परीक्षा को लेकर तमिलनाडु सरकार और केंद्र सरकार के बीच विवाद गहराता जा रहा है। स्टालिन का यह बयान न केवल उनके राज्य के छात्रों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष के एक मजबूत स्वर के रूप में भी सामने आता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस दबाव के बाद क्या कदम उठाती है।
