मध्य पूर्व में तनाव चरम पर: अमेरिका की ईरान समर्थित ठिकानों पर लगातार 12वीं कार्रवाई
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज कर दिया है। एनडीटीवी (NDTV) की जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सेना द्वारा ईरान समर्थित ठिकानों पर हमले की यह लगातार 12वीं रात थी। इस कदम ने मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।
क्या है अमेरिका की इस कार्रवाई के पीछे की वजह?
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने स्पष्ट किया है कि ये हमले क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और उनके सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे हैं। पिछले कुछ समय से इराक और सीरिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और रॉकेट से हमलों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। वाशिंगटन का मानना है कि इन हमलों के पीछे सीधे तौर पर ईरान और उससे जुड़े प्रॉक्सी समूह शामिल हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
इन सैन्य हमलों ने व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहता है, तो इसका प्रभाव न केवल इराक और सीरिया पर, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए ‘सटीक और प्रभावी’ जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
जहां एक ओर अमेरिका इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने इन हमलों को ‘संप्रभुता का उल्लंघन’ करार दिया है। इस स्थिति ने वैश्विक शक्तियों को भी सतर्क कर दिया है, जो क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए राजनयिक प्रयासों पर जोर दे रही हैं। फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष संयम बरतते हैं या यह संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
मध्य पूर्व का यह मौजूदा संकट वैश्विक भू-राजनीति के लिए एक बड़ी चुनौती है। अमेरिका की 12वीं रात की स्ट्राइक यह दर्शाती है कि बाइडेन प्रशासन अपने सैनिकों पर होने वाले हमलों को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। आने वाले दिन क्षेत्र की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।
