30/07/2026

संसद का मानसून सत्र: पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून की कवायद

संसद के मानसून सत्र का सातवां दिन काफी हंगामेदार रहा। लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक’ पर चर्चा शुरू हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य देश भर में हो रही प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लगाना है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बिल पेश करते हुए कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर है और यह कानून भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने में सक्षम होगा।

विपक्ष का तंज: ‘सजा नाकाफी’

हालांकि, इस बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार को घेरे में लिया। विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि बिल में प्रस्तावित सजा और दंड के प्रावधान इतने सख्त नहीं हैं कि वे अपराधियों के मन में डर पैदा कर सकें। विपक्षी सांसदों ने कहा कि पेपर लीक माफियाओं की जड़ें बहुत गहरी हैं और केवल जेल की सजा ही काफी नहीं है, बल्कि सिस्टम की पूरी पारदर्शिता पर काम करने की जरूरत है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने तर्क दिया कि हाल ही में हुई नीट (NEET) और यूजीसी नेट (UGC-NET) जैसी परीक्षाओं में हुई धांधली ने लाखों छात्रों के सपनों को तोड़ दिया है। उन्होंने मांग की कि इस कानून में पेपर लीक में शामिल बड़े अधिकारियों और कोचिंग माफियाओं के खिलाफ और भी सख्त और त्वरित न्याय प्रणाली होनी चाहिए।

बिल की मुख्य विशेषताएं

सरकार द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में निम्नलिखित प्रावधानों पर चर्चा की गई:

  • पेपर लीक या अनुचित साधनों के प्रयोग में संलिप्त पाए जाने पर कठोर दंड।
  • संगठित अपराध करने वाले गिरोहों की संपत्ति की कुर्की।
  • परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी सुधार।
  • संदेह के घेरे में आने वाले संस्थानों पर कड़ी निगरानी।

क्या यह बिल लीक रोकेगा?

सदन में बोलते हुए सरकार के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह बिल केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक निवारक (deterrent) है। सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने के बाद सिस्टम में डर पैदा होगा और परीक्षाओं की शुचिता बनी रहेगी। दूसरी ओर, विशेषज्ञों का मानना है कि कानून के साथ-साथ परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली में सुधार करना भी उतना ही आवश्यक है।

संसद का यह सत्र लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि क्या विपक्ष के सुझावों को शामिल कर इस बिल को और मजबूती दी जाती है या सरकार इसे अपने वर्तमान स्वरूप में ही पारित करवाती है।

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