30/07/2026

परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी: नंदन नीलेकणी को मिली कमान

हाल के दिनों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाओं को लेकर हुए विवादों और छात्रों के भारी विरोध के बाद, केंद्र सरकार ने शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) दिग्गज और आधार कार्ड के जनक माने जाने वाले नंदन नीलेकणी को परीक्षा सुधारों के लिए गठित एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स का प्रमुख नियुक्त किया गया है।

क्यों पड़ी इस टास्क फोर्स की जरूरत?

नीट (NEET) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी बड़ी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों और छात्रों के व्यापक विरोध के बाद, सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का बीड़ा उठाया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य तकनीकी हस्तक्षेप के जरिए परीक्षा के आयोजन से लेकर परिणाम तक की प्रक्रिया को फुल-प्रूफ बनाना है। नंदन नीलेकणी का अनुभव और तकनीकी दक्षता इस दिशा में सरकार के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकती है।

नंदन नीलेकणी की भूमिका और लक्ष्य

नंदन नीलेकणी, जो इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं, का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड ‘डिजिटल इंडिया’ की सफलता में ऐतिहासिक रहा है। वे न केवल तकनीकी सलाहकार के रूप में जाने जाते हैं, बल्कि बड़े स्तर पर बदलाव लाने की उनकी क्षमता जगजाहिर है। अपनी नई भूमिका में, नीलेकणी निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे:

  • तकनीकी सुरक्षा: परीक्षा के प्रश्न-पत्रों की सुरक्षा और डिजिटल वितरण में सुधार।
  • एनटीए (NTA) का पुनर्गठन: एजेंसी की कार्यप्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करना।
  • प्रक्रिया का डिजिटलीकरण: पूरी परीक्षा प्रणाली को आधुनिक सॉफ्टवेयर और एआई (AI) आधारित सुरक्षा कवच से लैस करना।

शिक्षा क्षेत्र में क्या बदलाव आएंगे?

विशेषज्ञों का मानना है कि नीलेकणी के नेतृत्व में, परीक्षा प्रक्रिया में ‘ह्यूमन इंटरफेस’ कम होगा, जिससे धांधली की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। आधार कार्ड परियोजना की तरह ही, शिक्षा बोर्ड भी एक मजबूत और पारदर्शी डेटाबेस की ओर बढ़ सकते हैं। यह कदम न केवल लाखों छात्रों का भरोसा वापस जीतने में मदद करेगा, बल्कि भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में भी सहायक होगा।

निष्कर्ष

नंदन नीलेकणी की नियुक्ति सरकार के उस इरादे को दर्शाती है, जिसमें वह शिक्षा क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नीलेकणी की टास्क फोर्स कब तक अपनी सिफारिशें पेश करती है और किस तरह से इन बदलावों को जमीन पर उतारा जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *